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PM Van Dhan Vikas Yojana 2020 | Online Registration | पीएम वन धन योजना

पीएम वन धन योजना 2020

हमारा ये लेख हमारे पर्यावरण, जैव-विविधता औऱ प्राकृतिक संसाधनो को समर्पित हैं और उन लोगो को समर्पित हैं जो कि, प्रकृति-प्रेमी हैं क्योंकि हम अपने इस लेख में आपको PM Van Dhan Vikas Yojna 2020 के बारे मं बताना जा रहे है जिसके माध्यम से भारत सरकार लगातार खत्म हो रहे वन-धन की सुरक्षा और उसका संरक्षण कर पाये और आम जनता इस कार्य में भारत सरकार की मदद करे सकें।

इस लेख में हम आपको PM Van Dhan Vikas Yojna 2020 की पूरी जानकारी देगे, इसकी विशेषताये बतायेगे, इस योजना का लक्ष्य बतायेगे, इस योजना के तहत शुरु किये जाने वाले वन-धन केंद्रो के साथ-साथ इस योजना का क्रियान्वयन कैसे किया जायेगा आदि की पूरी जानकारी हम आपको इस लेख में देंगे ताकि आप योजना को समझ सकें और अपने स्तर पर भी वन सम्पदा को धन की तरह ही संजो औऱ सहेज कर रख सकें।

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योजना की जानकारी

14 अप्रैल, 2018 को भारतीय संविधान निर्माता श्री. बाबा साहेब अंबेडकर के जन्मदिवस पर भारतीय प्रधानमंत्री श्री.नेरन्द्र मोदी द्धारा आधिकारीक तौर पर शुर किया गया जिसका एकमात्र लक्ष्य हैं भारत की वन सम्पदा को संरक्षित, सुरक्षित औऱ विकसित करना हैं ताकि भारत में, व्याप्त जैव-विविधता बनी  रहें और भारत वन धन सम्पदा के लिहाज से सदा समृद्ध रहें।

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योजना  के मुख्य आकर्षण

इस योजना अर्थात् प्रकृति संरक्षण के मुहिम के कई आकर्षण हैं क्योंकि इसकें माध्यम से जनजातिय, आदिवासीय औऱ अनुसूचित वर्ग के लोगो को उनकी आमदनी बढ़ाने के कई साधन मिलेगे जैसे कि-

  1. योजना के तहत 30,000 स्वंय सहायता समूहो की स्थापना की जायेगी,
  2. इस योजना की शुरुआत में सरकार 115 जिलो में आकांक्षात्मक तौर पर कार्य शुरु करेगी,
  3. इस योजना को वित्त वर्ष 2018-19 में शुरु किया गया था जिसे अब आगे बढाकर 2020 में 3,000 वन दन केंद्रो के रुप में बदलने जा रह ही हैं,
  4. इन वन-धन केंद्रो की शुरुआत में इन केंद्रो मे टेमारिंड ईटो का निर्माण, महूआ फूल निर्माण व चिरौंजी को साफ कर पैंक करके प्रसंस्करण करने जैसे रोजगार प्रदान किये जायेगे,
  5. योजना की शुरुआत में इन वन-धन विकास केंद्रो की स्थापना पंचायती स्तर पर शुरु की जा रही हैं जहां पर इनका संचालन स्वयं सहायता समूहो द्धारा किया जायेगा,
  6. इन वन धन विकास केंद्रो की सहायता से हमारे सभी जनजातिय लोगो, आदिवासीय लोगो औऱ अनुसूचित जाति के लोगो को आर्थिक सुरक्षा के तहत रोजगार मिलेगा,
  7. इस योजना के तहत जनजातिय लाभार्थियो का चयन और स्वंय सहायता केंद्रो के चयन का कार्य TRIFED को सौंपा गया हैं और आशा है कि, 10 अप्रैल, 2018 से इसकी शुरुआत हो जायेगी आदि।

बड़ी संख्या में होगी वन धन केंद्रो की स्थापना

इस योजना के पूरे क्रियान्वयन का कार्य जनजातिय कार्य मंत्रालय और राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत ट्राईफेड को सौंपा गया हैं और योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर एम.एफ.पी और जमीनी स्तर पर जिलाधीश महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगे जिससे इस योजना को सफलतापूर्वक लागू करके वन धन का संरक्षण औऱ सुरक्षा की जा सकेगी।

इस योजना के तहत भारत में बड़ी संख्या में जनजातिय जिलो में 2 वर्ष के भीतर 3,000 वन धन केंद्र स्थापित किये जायेगे व 39 जिलो में जिनकी आबादी 50 प्रतिशत से अधिक हैं में प्राथमिकता के तौर पर कार्य पहले ही शुरु किया जा चुका हैं ताकि पुरे देश में वन धन सम्पदा का व्यापक स्तर पर संरक्षण और विकास हो सकें। इस योजना के तहत समय के साथ-साथ अन्य जनजातिय क्षेत्रो को भी इसमें शामिल किया जायेगा।

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इन लक्ष्यो की पूर्ति के लिए होगी इन वन-धन केंद्रो की स्थापना

इन वन धन केंद्रो की स्थापना जिन उद्धेश्य को लेकर की गई हैं उनकी एक सूची इस प्रकार हैं –

  1. देश में व्यापक स्तर पर वन सम्पदा को प्रोत्साहन देना,
  2. पर्यावरण सुरक्षा औऱ संऱक्षण की दिशा में कार्य को गति प्रदान करना,
  3. स्थानीय लोगो को वन धन सम्पदा की सुरक्षा और संरक्षण के बारे में जागरुक करना,
  4. स्थानीय लोगो को रोजगार प्रदान कर उनकी सामाजिक औऱ आर्थिक स्थिति में सुधार करते हुए नई पहचान देना,
  5. एम.एफ.पी में मूल्य वृद्धि कर जनजातिय समुदायो को व्यवस्थित औऱ समृद्ध करना हैं,
  6. जनजातियो समुदायो को वनोत्पाद एकत्रित करने वालो व मजदूरो को बेहतर आजीविका के साधन प्रदान करना हैं,
  7. योजना के तहत गैर-लकडी वन उत्पाद में जनजातिय समुदायो की भागीदारी को 20 प्रतिशत से बढाकर 60 प्रतिशत कर उनकी आमदनी मे वृद्धि करना हैं,
  8. गैर-लकड़ी वनोत्पादो से 5 करोड़ जनजातिय समुदायो को आर्थिक सुरक्षा के तहत आय के स्रोत मुहैया करवाना,
  9. स्थानीय जनजातीय लोगो को कौशल प्रदान कर स्थानीय विकास का भागीदान बनाना आदि।

उपरोक्त लक्ष्यो की पूर्ति से हमारे भारत की वन सम्पदा का विस्तार औऱ बेहतर विकास हो सकेगा।

 

बेहद व्यापक हैं योजना के क्रियान्वयन का ब्लू-प्रिंट

हम आपको बताना चाहते है कि, इस योजना के क्रियान्वयन का ब्लू-प्रिंट बेहद व्यापक औऱ विशाल हैं क्योंकि इस योजना के तहत उन सभी भारतीय राज्यो को शामिल किया जदा रहा हैं जिनमें अनुसूचित क्षेत्र व अनुसूचित आदिवासी हैं ताकि योजना के क्रियान्वयन के साथ-साथ इनका सामाजिक सशक्तिकरण, जीवन स्तर में वृद्धि, आमदनी के स्रो प्रदान करना औऱ इन्हें हमारी प्राकृतिक वन-सम्पदा आदि के प्रति जागरुक कर सकें।

इस योजना का क्रियान्वयन भारत के आधे से ज्यादा राज्यो में किया जा रहा हैं जैसे कि –बिहार, अरुणाचल प्रदेश, असम, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखँड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर पूर्वे के सभी राज्यो को मिलते हुए दमन-दीव में भी इस योजना का क्रियान्वयन किया जायेगा ताकि पूरे देश में वन-धन की सुरक्षा, संरक्षण औऱ विकास हो सकें।

FAQ’s

योजना को लेकर आपके Q. और हमारे Ans.

इस योजना को लेकर हमें आपकी तरफ से कई Q. मिले हैं जिनका हमने इस प्रकार से Ans. दिया हैं-

Q– योजना का मौलिक लक्ष्य क्या हैं ?

Ans. – योजना का मौलिक लक्ष्य हैं भारत की वन सम्पदा को समृद्ध करते हुए जनजातिय लोगो की आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक व आर्थिक जीवन स्तर पर में वृद्धि।

Q– इस योजना को किस राज्य में लागू किया जायेगा ?

Ans. – इस योजना को पूरे भारत में लागू किया जायेगा।

Q– कितने वन धन केंद्रो की स्थापना की जायेगी इस योजना के तहत ?

Ans. – इस योजना के तहत 3,000 वन धन सम्पदा की स्थापना की जायेगी।

Q– योजना के तहत कितने स्वंय सहायता समूहो की स्थापना की जायेगी।

Ans. – योजना के तहत लगभग 30,000 स्वयं सहायता समूहो की स्थापना की जायेगी।

Q– इस योजना का जनजातियो पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?

Ans. – इस योजना का हमारे जनजातियो पर सकारात्मक प्रभाव पडेगा, उनकी आमदनी बढेगी और उनका सामाजिक आर्थिक सशक्तिकरण होगा।

Q– कितने गैर-लकड़ी उत्पादो को लाभ मिलेगा?

Ans.- इस योजना से लगभग 5 करोड़ गैर-लकड़ी उत्पादको को लाभ मिलेगा और उनकी आमदनी मे इजाफा होगा।

Q– योजना के तहत जनजातियो की भागीदारी कितने प्रतिशत बढ़ा दी जायेगी?

Ans. – योजना के तहत जनजातियो की भागीदारी को 20 प्रतिशत से बढाकर 60 प्रतिशत कर दी जायेगी जिससे उनका आर्थिक सशक्तिकरण होगा।

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